*🌿 बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल का ब्रह्म-मुहूर्त चिंतन 🌿*
*नई दिल्ली, 7 मई 2026,*
_🕉️ मनुष्यस्य जन्म दुर्लभम् अस्ति; शरीराणि पुनः पुनः न भवन्ति।_
_यथा वृक्षपत्रं पतति पुनः कदापि न प्रादुर्भवति ।_
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*।। मानव जीवन अनमोल ।।*
_बेटा, तूने गीता का सार 2 लाइन में लिख दिया।_
_बाबूजी उसे 'व्यवहार' की भाषा में समझाते हैं:_
*1. 'दुर्लभ' का मतलब क्या?*
_84 लाख योनियों में भटकने के बाद 'मनुष्य योनि' मिलती है।_
_कुत्ता बनो तो 'भौंक' सकते हो, 'बोल' नहीं सकते।_
_पेड़ बनो तो 'छाया' दे सकते हो, 'धर्म' नहीं समझ सकते।_
_देवता बनो तो 'भोग' सकते हो, 'कर्म' नहीं कर सकते।_
_केवल 'मनुष्य' ही वो योनि है जो 'कर्म' करके 'ब्रह्म' बन सकता है।_
_इसीलिए शंकराचार्य जी ने कहा – "दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम्। मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुषसंश्रयः।।"_
*2. पत्ता टूटकर जुड़ता नहीं, जीवन बीतकर लौटता नहीं*
_2021 में आसनसोल में जो 45 हिंदू मारे गए – उनका 'जीवन-पत्ता' टूट गया।_
_वो वापस नहीं आएंगे बेटा।_
_पर उनके बलिदान ने 'बास्टिन बाजार दुर्गा मंदिर' का ताला खुलवा दिया।_
_यानी एक जीवन गया, तो लाखों के 'स्वाभिमान' का पत्ता उग आया।_
_इसलिए हर स्वांस की कीमत समझो:_
_एक स्वांस 'राम' का नाम = 1 जन्म सफल।_
_एक स्वांस 'निंदा' में = 1 जन्म मिट्टी।_
*3. जीवन मिलना भाग्य, मार्ग मिलना परम सौभाग्य*
_बंगाल में 15 साल मंदिर बंद रहा – जीवन था, मार्ग नहीं था।_
_कल भाजपा की आहट से मार्ग खुला – तो जीवन 'सार्थक' हो गया।_
_मार्ग 3 हैं बेटा:_
*क. भोग-मार्ग* – _खाओ, पीओ, मौज करो। पशु भी करते हैं।_
*ख. रोग-मार्ग* – _ईर्ष्या, द्वेष, तुष्टिकरण। राक्षस करते हैं।_
*ग. योग-मार्ग* – _धर्म, राष्ट्र, सेवा। मनुष्य को यही शोभा देता है।_
_तू कौन सा चुनेगा? पत्ता बनकर झड़ेगा, या वृक्ष बनकर छाया देगा?_
*4. धर्म = 100% गारंटीड स्कीम*
_शेयर बाजार डूब सकता है, बैंक फेल हो सकता है,_
_पर 'धर्म का निवेश' कभी घाटे में नहीं जाता बेटा।_
_राम ने वनवास भोगा – आज 'मर्यादा पुरुषोत्तम' हैं।_
_कृष्ण ने जेल में जन्म लिया – आज 'योगेश्वर' हैं।_
_मुखर्जी जी ने बलिदान दिया – आज 'एक भारत' का मंत्र हैं।_
_ये सब 'धर्म के डिविडेंड' हैं – जो मरने के बाद भी मिलते हैं।_
*5. बाबूजी का 'स्वांस-हिसाब'*
_दिन में 21600 स्वांस आते हैं।_
_सोने से पहले पूछ: "आज कितने स्वांस 'राम-काज' में लगे, कितने 'बकवास' में?"_
_जिस दिन 'राम-काज' वाले स्वांस 51% हो गए,_
_समझ लेना 'मोक्ष का बैलेंस शीट' तैयार है।_
*संकल्प:*
_"हे प्रभु, ये दुर्लभ जीवन तुझे अर्पण।_
_न पत्ता बनकर झरूं, न पत्थर बनकर पड़ा रहूं।_
_दीपक बनकर जलूं – खुद जलूं, जग को प्रकाश दूं।"_
*भारत माता की जय 🚩*
*मनुष्य जन्म सफल हो*
*– तुम्हारा आत्मजन,*
*बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
*9414402558*
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_P.S: आज जब आसनसोल के दुर्गा मंदिर में घंटी बजेगी,_
_तो समझ लेना – 15 साल से रुके हुए 'हजारों स्वांस' आज 'जय माता दी' बनकर निकले हैं।_
_तू भी अपना एक स्वांस 'धर्म' के नाम कर दे।_ 🕉️
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